Skip to main content

10 Class Science Chapter 3 धातु एवं अधातु notes in hindi

  Class 10 science Chapter 3 धातु एवं अधातु Notes in hindi  Chapter = 3   धातु एवं अधातु  वर्तमान में  118 तत्व  ज्ञात हैं । इनमें  90 से अधिक धातुऐं  ,  22 अधातुऐं और कुछ उपधातु  हैं ।  धातु :-  पदार्थ जो कठोर , चमकीले , आघातवर्ध्य , तन्य , ध्वानिक और ऊष्मा तथा विद्युत के सुचालक होते हैं , धातु कहलाते हैं ।  जैसे :-  सोडियम ( Na ) , पोटाशियम ( K ) , मैग्नीशियम ( Mg ) , लोहा ( Fc ) , एलूमिनियम ( AI ) , कैल्शियम ( Ca ) , बेरियम ( Ba ) धातुऐं हैं ।  धातुओं के उपयोग :-   धातुओं का उपयोग इमारत , पुल , रेल पटरी को बनाने में , हवाईजहाज , समुद्री जहाज , गाड़ियों के निर्माण में , घर में उपयोग होने वाले बर्तन , आभूषण , मशीन के पुर्जे आदि के निर्माण में किया जाता है ।  अधातु :- जो पदार्थ नरम , मलिन , भंगुर , ऊष्मा तथा विद्युत के कुचालक होते हैं , एवं जो ध्वानिक नहीं होते हैं अधातु कहलाते हैं ।  जैसे :-  ऑक्सजीन ( O ) , हाइड्रोजन ( H ) , नाइट्रोजन ( N ) , सल्फर ( S ) , फास्फोरस ( P ) , फ्लूओरीन...

Class 10 science Chapter 4 कार्बन एवं उसके यौगिक Notes in Hindi


10 Class Science Chapter 4 कार्बन एवं उसके यौगिक notes in Hindi

TextbookNCERT
ClassClass 10
Subjectविज्ञान
ChapterChapter 4
Chapter Nameकार्बन एवं उसके यौगिक
CategoryClass 10 Science Notes
MediumHindi
Class 10 science Chapter 4 कार्बन एवं उसके यौगिक Notes in hindi

📚 Chapter = 4 📚
💠 कार्बन एवं उसके यौगिक💠

❇️ कार्बन :-

🔹 कार्बन एक सर्वतोमुखी तत्व है । कार्बन भूपर्पटी में खनिज के रूप में 0.02% उपस्थित है । वायुमंडल में यह कार्बन डाइऑक्साइड के रूप में 0.03% उपस्थित है । सभी सजीव संरचनायें कार्बन पर आधरित हैं । कागज , प्लास्टिक , चमड़े और रबड़ में कार्बन होता है ।




❇️ कार्बन एवं उसके यौगिकों का उपयोग :-

🔹 कार्बन एवं उसके यौगिकों का उपयोग अधिकतर अनुप्रयोगों में ईंधन के रूप में किया जाता है क्योंकि कार्बन के ऑक्सीजन ( वायु ) में दहन पर कार्बन डाइऑक्साइड जल का निर्माण होता है तथा बहुत बड़ी मात्रा में ऊष्मा और प्रकाश उत्पन्न होता है । 

🔹 इसके अतिरिक्त इनका ज्वलन ताप मध्यम , कैलोरी मान अधिक होता है तथा इनके दहन से कोई अवशेष नहीं बचता और न ही हानिकारक गैसें उत्पन्न होती हैं ।

❇️ कार्बन उत्कृष्ट गैस विन्यास कैसे प्राप्त करता है ? 

🔹 कार्बन की परमाणु संख्या 6 है तथा इलैक्टॉनिक विन्यास K – 2 , L – 4 होता है ।



🔶 उत्कृष्ट गैस विन्यास को प्राप्त करने के लिए :-

  • कार्बन का परमाणु 4 इलैक्ट्रॉन प्राप्त कर सकता है , परंतु नाभिक के लिए 4 अतिरिक्त इलेक्ट्रॉन धारण करना कठिन है ।
  • कार्बन का परमाणु 4 इलैक्ट्रॉन छोड़ सकता है , परंतु इसके लिए अत्याधिक ऊर्जा की आवश्यकता होगी ।

🔹 इस प्रकार कार्बन के परमाणु के लिए 4 इलैक्ट्रॉन प्राप्त करना या खो देना अत्यंत कठिन होता है । 

🔹 कार्बन अपने अन्य परमाणुओं अथवा अन्य तत्वों के परमाणुओं के साथ संयोजकता इलेक्ट्रॉनों की साझेदारी करके इस समस्या को सुलझा लेता है । 

🔹 H , O , N एवं CI जैसे तत्व के परमाणु इलैक्ट्रॉन साझेदारी करने में सक्षम है ।

❇️ सहसंयोजी आबंध :-

🔹 दो परमाणुओं के बीच इलेक्ट्रॉन के एक युग्म की साझेदारी के बनने वाले आबंध सहसंयोजी आबंध कहलाते हैं ।

❇️ सहसंयोजी आबंध यौगिकों के भौतिक गुण :-

  • सहसंयोजी यौगिकों के क्वथनांक एवं गलनांक कम होते हैं क्योंकि इनके बीच अन्तराअणुक बल कम होता है । 
  • सामान्यत : ये अणु विद्युत के कुचालक होते है क्योंकि आवेशित कण नहीं बनते ।

❇️ कार्बन के अपररूप :-

  • हीरा 
  • ग्रेफाइट 
  • फूलरीन 


🔹 हीरा एवं ग्रेफ़ाइट दोनों ही कार्बन के परमाणुओं से बने हैं । इन अपररूपों के रासायिनक गुण एकसमान होते हैं लेकिन भौतिक गुणधर्म भिन्न होते हैं । 

🔹 हीरे में कार्बन का प्रत्येक परमाणु कार्बन के चार अन्य परमाणुओं के साथ आबंधित होता है जिससे एक दृढ़ त्रिआयामी संरचना बनती है । 

🔹 ग्रेफाइट में कार्बन के प्रत्येक परमाणु का आबंधन कार्बन के तीन अन्य परमाणुओं के साथ एक ही तल पर होता है जिससे षट्कोणीय व्यूह मिलता है । ग्रेफ़ाइट की संरचना में षट्कोणीय तल एक दूसरे के ऊपर व्यवस्थित होते हैं । 

❇️ हीरे तथा ग्रेफाइट में अंतर :-

हीरा ग्रेफाइट 
यह कठोरतम प्राकृतिक पदार्थ है । यह कोमल होता है । 
हीरा विद्युत का कुचालक और ऊष्मा का सुचालक होता है । ग्रेफाइट विद्युत और ऊष्मा का सुचालक होता है । 
हीरा पारदर्शी होता है ।ग्रेफाइट अपारदर्शी होता है ।

❇️ कार्बन की सर्वतोमुखी प्रकृति :-

🔹 सहसंयाजी बंध की प्रकृति के कारण कार्बन में बड़ी संख्या में यौगिक बनाने की क्षमता है । इसके दो कारक हैं :-

  • श्रृंखलन 
  • चतुः संयाजकता

🔶 श्रृंखलन :- कार्बन में कार्बन के ही अन्य परमाणुओं के साथ आबन्ध बनाने की अद्वितीय क्षमता होती है जिससे बड़ी संख्या में अणु बनते हैं , इस गुण को श्रृंखलन कहते हैं । श्रृंखलन के कारण कार्बन यौगिकों की संख्या विशाल है ।

🔶 चतु : संयोजकता :- कार्बन चतु : संयोजन प्रकृति का तत्व है , इसलिए यह चार अन्य कार्बन परमाणु अथवा किन्हीं एकल संयोजी तत्वों के परमाणुओं के साथ आबन्ध बनाने में सक्षम है , जिसके कारण कार्बन यौगिकों की विशाल संख्या है ।

❇️ संतृप्त यौगिक :-

🔹 कार्बन परमाणुओं के बीच केवल एक आबंध से जुड़े कार्बन के यौगिक संतृप्त यौगिक कहलाते हैं । सामान्यतः ये यौगिक अधिक अभिक्रियाशील नहीं होते ।

❇️ असंतृप्त यौगिक :-

🔹द्वि- अथवा त्रि – आबंध वाले कार्बन के यौगिक असंतृप्त यौगिक कहलाते हैं ।

❇️ हाइड्रोकार्बन :-

🔹 कार्बन और हाइड्रोजन के यौगिकों को हाइड्रोकार्बन कहते हैं ।

❇️ एथेन , एथीन , एथाइन :-

  • कार्बन एवं हाइड्रोजन से बनने वाला अन्य यौगिक एथेन है जिसका सूत्र C₂H₆ है । 
  • किंतु कार्बन एवं हाइड्रोजन के एक अन्य यौगिक का सूत्र C₂H₄ है जिसे एथीन कहते हैं ।
  • हाइड्रोजन एवं कार्बन के एक अन्य यौगिक का सूत्र C₂H₋₂ एथाइन कहते हैं ।

❇️ संरचनात्मक समावयव :-

🔹 वे यौगिक जिनके आणविक सूत्र तो समान होते हैं परंतु संरचना भिन्न होती हैं । संरचनात्मक समावयव कहलाते हैं ।

❇️ विषम परमाणु :-

🔹 हाइड्रोकार्बन श्रृंखला में वह तत्व एक या अधिक हाइड्रोजन को इस प्रकार प्रतिस्थापित करते हैं कि कार्बन की संयोजकता संतुष्ट रहती है । ऐसे तत्वों को विषम परमाणु कहते हैं । 

❇️ प्रकार्यात्मक समूह :-

🔹 यह विषम परमाणु या विभिन्न परमाणुओं का समूह जो कार्बन यौगिकों को अभिक्रियाशीलता तथा विशिष्ट गुण प्रदान करते हैं , प्रकार्यात्मक समूह कहलाते हैं ।

❇️ समजातीय श्रेणी :-

🔹 यौगिकों की वह शृंखला जिसमें कार्बन श्रृंखला में स्थित हाइड्रोजन एक ही प्रकार के प्रकार्यात्मक समूह द्वारा प्रतिस्थापित होता है उसे समजातीय श्रेणी कहते हैं । 

🔹 उदाहरण :- एल्कोहल CH₃OH, C₂H₅OH , C₃H₇OH , C₄H₉OH 

❇️ समजातीय श्रेणी की विशेषताए :-

  • समजातीय श्रेणी के उत्तरोतर सदस्यों में -CH₂ का अंतर तथा 14 द्रव्यमान इकाई का अंतर होता है । 
  • इन सदस्यों को प्रकार्यात्मक समूह विशिष्टतायें प्रदान करता है फलस्वरूप ये सदस्य समान रसायनिक गुणधर्म तथा भिन्न भौतिक गुणधर्म दर्शाते हैं । 
  • सदस्यों के अणु द्रव्यमान में अंतर होने के कारण इनके भौतिक गुणधर्मों में अंतर आता है । 
  • अणु द्रव्यमान के बढ़ने के कारण सदस्यों का गलनांक एवं क्वथनांक बढ़ता है ।

❇️ कार्बन यौगिकों की नामपद्धति :-

🔹 किसी समजातीय श्रेणी में यौगिकों के नामों का आधार बेसिक कार्बन की उन मूल शृंखलाओं पर आधारित होता है जिनको प्रकार्यात्मक समूह की प्रकृति के अनुसार पूर्वलग्न ‘ ‘ उपसर्ग ‘ या ‘ अनुलग्न ‘ ‘ प्रत्यय ‘ के द्वारा संशोधित किया गया हो ।

❇️ कार्बन यौगिकों के रासायनिक गुणधर्म :-

🔶 दहन :-

🔹 सामान्यत : ये यौगिक वायु ( ऑक्सीजन ) में दहित होकर कार्बन डाइऑक्साइड , जल उत्पन्न करते हैं । तथा प्रचुर मात्रा में ऊष्मा एवं प्रकाश को मुक्त करते हैं । 

तापन CH₄ + 2O₂ → CO₂ + 2H₂O + उष्मा + प्रकाश

🔹 संतृप्त हाइड्रोकार्बन वायु की प्रचुर मात्रा में जलने पर नीली ज्वाला तथा वायु की सीमित आपूर्ति में कज्जली ज्वाला उत्पन्न करते है । 

🔹 असंतृप्त हाइड्रोकार्बन दहन करने पर कज्जली ज्वाला उत्पन्न करते हैं । 

🔹 कोयले तथा पैट्रोलियम के दहन द्वारा सल्फर तथा नाइट्रोजन के ऑक्साइड निर्मित होते हैं जो अम्लीय वर्षा के लिये उत्तरदायी हैं । 

❇️ ऑक्सीकारक :-

🔹 कुछ पदार्थों में अन्य पदार्थों को ऑक्सीजन देने की क्षमता होती है ऐसे पदार्थ को ऑक्सीकारक कहते हैं ।

🔹 जैसे :- क्षारीय KMnO₄ ( पोटैशियम परमैंगनेट ) , अम्लीकृत K₂Cr₂0₇ ( पोटैशियम डाइक्रोमेट ) ।

❇️ ऑक्सीकरण अभिक्रिया :-

🔹 ऑक्सीकरण अभिक्रिया में यौगिक द्वारा ऑक्सीजन का संयोग होता है एवं हाइड्रोजन पृथक् होती है । एथेनॉल से एथेनोइक अम्ल में परिवर्तन को ऑक्सीकरण अभिक्रिया कहा जाता है क्योंकि एथेनॉल से एथेनोइक अम्ल बनने में ऑक्सीजन का संयोग होता है तथा हाइड्रोजन पृथक् होती है ।

❇️ संकलन अभिक्रिया :-

🔹 निकैल , पैलडियम या प्लैटिनम की उपस्थिति में असंतृप्त होइड्रोकार्बन हाइड्रोजन के साथ जुडकर संतृप्त हाइड्रोकार्बन निर्मित करते हैं । इस प्रक्रम द्वारा वनस्पति तेल को वनस्पति घी में परिवर्तित किया जाता है ।

नोट :- संतृप्त वसीय अम्ल स्वास्थ्य के लिये हानिकारक हैं । भोजन पकाने के लिये असंतृप्त वसीय तेलों का उपयोग करना चाहिये ।

❇️ प्रतिस्थापन अभिक्रिया :-

🔹 संतृप्त हाइड्रोकार्बन अत्यधिक अनभिक्रित होते हैं तथा अधिकांश अभिकर्मकों की उपस्थिति में अक्रिय होते हैं । हालाँकि , सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में अति तीव्र अभिक्रिया में क्लोरीन का हाइड्रोकार्बन में संकलन होता है । क्लोरीन एक – एक करके हाइड्रोजन के परमाणुओं का प्रतिस्थापन करती है । इसको प्रतिस्थापन अभिक्रिया कहते हैं क्योंकि एक प्रकार का परमाणु , अथवा परमाणुओं के समूह दूसरे का स्थान लेते हैं ।

❇️ एथेनॉल के गुणधर्म :-

🔶 एथेनॉल के भौतिक गुणधर्म :-

  • रंगहीन गंध और जलने वाला स्वाद 
  • जल में घुलनशील
  • क्वथनांक 351K 
  • गलनांक 156 K
  • उदासीन प्रकृति 

🔶 ऐथेनॉल के रासानियक गुणधर्म :-

  • C₂H₅OH की सोडिसम के साथ अभिक्रिया में सोडियम इथॉक्साइड तथा हाइड्रोजन उत्पन्न होती है । 
  • सांद्र H₂SO₄ के साथ 443K के तापमान पर ऐथेनॉल के निर्जलीकरण द्वारा एथीन उत्पन्न होती है ।

❇️ ऐथेनॉल के उपयोग :-

  • ऐल्कोहॉलिक पेयों में 
  • दवाओं तथा टॉनिकों में
  • प्रयोगशाला अभिकारक के रूप में
  • साबुन निर्माण में

❇️ एथेनॉइक अम्ल ( एसीटिक अम्ल ) भौतिक गुणधर्म :-

  • रंगहीन द्रव , स्वाद में खट्टा , सिरके जैसी गंध 
  • क्वथनांक 391K 
  • गलनांक 290 K

🔹 ऐसिटिक अम्ल का 3-4 % का जलीय विलयन सिरका कहलाता है ।

🔹 शुद्ध एथेनॉइक अम्ल शीतलन करने पर बर्फ की तरह जम जाता है इसीलिए इसे ग्लैशल एसीटिक अम्ल कहते हैं । 

❇️ एथेनॉइक अम्ल की अभिक्रियाएँ :-

🔶 एस्टरीकरण अभिक्रिया :- एस्टर मुख्य रूप से अम्ल एवं ऐल्कोहॉल की अभिक्रिया से निर्मित होते हैं । एथेनॉइक अम्ल किसी अम्ल उत्प्रेरक की उपस्थिति में परिशुद्ध एथनॉल से अभिक्रिया करके एस्टर बनाते हैं ।

🔶 क्षारक के साथ अभिक्रिया :- खनिज अम्ल की भाँति एथेनॉइक अम्ल सोडियम हाइड्रोक्सॉइड जैसे क्षारक से अभिक्रिया करके लवण ( सोडियम एथेनोएट या सोडियम ऐसीटेट ) तथा जल बनाता है । 

🔶 कार्बोनेट एवं हाइड्रोजनकार्बोनेट के साथ अभिक्रिया :- एथेनॉइक अम्ल कार्बोनेट एवं हाइड्रोजनकार्बोनेट के साथ अभिक्रिया करके लवण , कार्बन डाइऑक्साइड एवं जल बनाता है । इस अभिक्रिया में उत्पन्न लवण को सोडियम ऐसीटेट कहते हैं ।

❇️ साबुन और अपमार्जक :-

🔶 साबुन :-

  • साबुन लंबी श्रंखला वाले कार्बोक्सिलिक अम्लों के सोडियम एवं पोटाशियम लवण होते है । 
  • साबुन केवल मृदु जल के साथ सफाई क्रिया करते हैं तथा कठोर जल के साथ प्रभावहीन होते है । 
  • साबुन के अणु में जलरागी एवं जलविरागी समूह होते हैं ।

🔶 अपमार्जक :-

🔹 लम्बी श्रृंखला वाले कार्बोक्सिलिक अम्ल के अमोनियम एवं सल्फोनेट लवण होते हैं । अपमार्जक मृदु तथा कठोर जल के साथ सफाई प्रक्रिया सकते है । 

❇️ जलरागी व जलविरागी :-

🔹 साबुन के अणु ऐसे होते हैं जिनके दोनों सिरों के विभिन्न गुणधर्म होते हैं । जल में विलेय एक सिरे को जलरागी कहते हैं तथा हाइड्रोकार्बन में विलेय दूसरे सिरे को जलविरागी कहते हैं । 

❇️ मिसेल :-

🔹 जल के अंदर अणुओं की एक विशेष व्यवस्था जिससे इसका हाइड्रोकार्बन सिरा जल के बाहर बना होता है । ऐसा अणुओं का बड़ा गुच्छा बनने के कारण होता है जिसमें जलविरागी पूँछ गुच्छे के आंतरिक हिस्से में होती है जबकि उसका आयनिक सिरा गुच्छे क सतह पर होता है । इस संरचना को मिसेल कहते हैं ।

❇️ साबुन की सफाई प्रक्रिया :-

  • अधिकांश मैल तैलीय होता है तथा जलविरागी छोर इस मैल के साथ जुड़ जाता है । 
  • जल के अणु जलरागी छोर पर साबुन के अणु को घेर लेते है ।  
  • फलस्वरूप साबुन के अणु मिसेली संरचना बनाते है ।

🔹 इस प्रक्रिया में साबुन के अणु और तैलिय मैल का पायस बनता है तथा विभिन्न भौतिक विधियों जैसे पटकना डंडे से पीटना , ब्रुश से रगड़ना आदि की सहायता से वस्त्र साफ होता है । 

❇️ अघुलनशील पदार्थ / स्कम :-

🔹 कठोर जल में प्रयुक्त मैग्नीशियम तथा कैल्शियम के लवण साबुन के जलराग भार से अभिक्रिया करके अघुलनशील पदार्थ या स्कम बनाते हैं । जिसके कारण सफाई प्रक्रिया बाधित होती है । 

🔹 अपमार्जक के अणु का आवेशित सिरा कठोर जल में उपस्थित कैल्शियम एवं मैग्नीशियम आयनों को साथ अघुलनशील पदार्थ नहीं बनाते , फलस्वरूप सफाई प्रक्रिया प्रभावशाली रूप से संपन्न होती है । 

🔹 साबुन पूर्णतया जैव – निम्नकरणीय होते है । जबकि अपमार्जक नहीं । साबुन पर्यावरण हितैषी होते है लेकिन अपमार्जक नहीं । 

Comments

Popular posts from this blog

Class 10 History Chapter 1 यूरोप में राष्ट्रवाद का उदय

                    Class 10 History Chapter 1 यूरोप में राष्ट्रवाद का उदय Notes in Hindi                                                                                                         अध्याय = 1                                                                       यूरोप में राष्ट्रवाद का उदय           राष्ट्र :- अरनेस्ट रेनर के अनुसार समान भाषा नस्ल धर्म से बने क्षेत्र को राष्ट्र कहते हैं ।  ए...

Class 10 science Chapter 12 विद्युत Notes in Hindi

  10 Class Science Chapter 12 विद्युत notes in hindi Class 10 science Chapter 12 विद्युत notes in hindi.  जिसमे हम विद्युत प्रवाह , ओम का नियम , प्रतिरोधकता ,  कारक  जिन पर किसी चालक का प्रतिरोध निर्भर करता है ,  प्रतिरोधकों का श्रेणी क्रम संयोजन , विधुत धारा का तापीय प्रभाव आदि के बारे में पड़ेंगे । Class 10 science Chapter 12 विद्युत Notes in hindi  Chapter = 12   विद्युत  विद्युत ऊर्जा :-  किसी चालक में विद्युत आवेश प्रवाहित होने से जो ऊर्जा व्यय होती है उसे विद्युत ऊर्जा कहते हैं ।   यदि किसी चालक के सिरों के बीच विभवांतर V वोल्ट हो , तो q कूलॉम आवेश के चालक के एक सिरे से दूसरे सिरे तक ले जाने में व्यय विद्युत ऊर्जा  w = qv   विद्युत परिपथ :-  किसी विद्युत धारा के सतत तथा बंद पथ को विद्युत परिपथ कहते है ।  आवेश :-  आवेश परमाणु का एक मूल कण होता है । यह धनात्मक भी हो सकता है और ऋणात्मक भी । समान आवेश एक – दूसरे को प्रतिकर्षित करते हैं । असमान आवेश एक – दूसरे को आकर्षित करते हैं । कूलॉम...