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10 Class Science Chapter 3 धातु एवं अधातु notes in hindi

  Class 10 science Chapter 3 धातु एवं अधातु Notes in hindi  Chapter = 3   धातु एवं अधातु  वर्तमान में  118 तत्व  ज्ञात हैं । इनमें  90 से अधिक धातुऐं  ,  22 अधातुऐं और कुछ उपधातु  हैं ।  धातु :-  पदार्थ जो कठोर , चमकीले , आघातवर्ध्य , तन्य , ध्वानिक और ऊष्मा तथा विद्युत के सुचालक होते हैं , धातु कहलाते हैं ।  जैसे :-  सोडियम ( Na ) , पोटाशियम ( K ) , मैग्नीशियम ( Mg ) , लोहा ( Fc ) , एलूमिनियम ( AI ) , कैल्शियम ( Ca ) , बेरियम ( Ba ) धातुऐं हैं ।  धातुओं के उपयोग :-   धातुओं का उपयोग इमारत , पुल , रेल पटरी को बनाने में , हवाईजहाज , समुद्री जहाज , गाड़ियों के निर्माण में , घर में उपयोग होने वाले बर्तन , आभूषण , मशीन के पुर्जे आदि के निर्माण में किया जाता है ।  अधातु :- जो पदार्थ नरम , मलिन , भंगुर , ऊष्मा तथा विद्युत के कुचालक होते हैं , एवं जो ध्वानिक नहीं होते हैं अधातु कहलाते हैं ।  जैसे :-  ऑक्सजीन ( O ) , हाइड्रोजन ( H ) , नाइट्रोजन ( N ) , सल्फर ( S ) , फास्फोरस ( P ) , फ्लूओरीन...

10 Class Science Chapter 3 धातु एवं अधातु notes in hindi

 

Class 10 science Chapter 3 धातु एवं अधातु Notes in hindi

📚 Chapter = 3 📚
💠 धातु एवं अधातु💠

🔹 वर्तमान में 118 तत्व ज्ञात हैं । इनमें 90 से अधिक धातुऐं 22 अधातुऐं और कुछ उपधातु हैं ।

❇️ धातु :- 

पदार्थ जो कठोर , चमकीले , आघातवर्ध्य , तन्य , ध्वानिक और ऊष्मा तथा विद्युत के सुचालक होते हैं , धातु कहलाते हैं । 

जैसे :- सोडियम ( Na ) , पोटाशियम ( K ) , मैग्नीशियम ( Mg ) , लोहा ( Fc ) , एलूमिनियम ( AI ) , कैल्शियम ( Ca ) , बेरियम ( Ba ) धातुऐं हैं ।

❇️ धातुओं के उपयोग :- 

🔹 धातुओं का उपयोग इमारत , पुल , रेल पटरी को बनाने में , हवाईजहाज , समुद्री जहाज , गाड़ियों के निर्माण में , घर में उपयोग होने वाले बर्तन , आभूषण , मशीन के पुर्जे आदि के निर्माण में किया जाता है ।

❇️ अधातु :-

जो पदार्थ नरम , मलिन , भंगुर , ऊष्मा तथा विद्युत के कुचालक होते हैं , एवं जो ध्वानिक नहीं होते हैं अधातु कहलाते हैं । 

जैसे :- ऑक्सजीन ( O ) , हाइड्रोजन ( H ) , नाइट्रोजन ( N ) , सल्फर ( S ) , फास्फोरस ( P ) , फ्लूओरीन ( F ) , क्लोरीन ( CI ) , ब्रोमीन ( Br ) , आयोडिन ( I ) , अधातुऐं हैं ।

❇️ अधातुओं के उपयोग :-

ऑक्सीजन हमारे जीवन के लिए आवश्यक है , जिसे सजीव श्वसन के समय अन्दर लेते हैं ।

नाइट्रोजन का उपयोग उर्वरकों में पौधों की वृद्धि हेतु किया जाता है । 

क्लोरीन का उपयोग जल शुद्धिकरण प्रक्रम में किया जाता है । 

आयोडीन का विलयन एंटीबायोटिक के रूप में घावों पर लगाया जाता है ।

❇️ धातुओं और अधातुओं में अंतर :-

धातुएँअधातुऐं 
मर्करी के अतिरिक्त , सभी कक्ष ताप पर ठोस रूप में होते हैं ।तीनों अवस्थाओं में व्यापक , ब्रोमीन तरल अधातु है । 
तन्य और आघातवर्ध्य होते हैं । अधातुऐं तन्य और आघातवर्ध्य नहीं होती । 
ध्वानिक और चमक दर्शाने वाले गुण होते है ।अधातुऐं ध्वानिक नहीं होती और चमकहीन होती हैं ।
सामान्यत : उच्च घनत्व , लेकिन सोडियम और पोटाशियम का धनत्व कम होता है ।अधातुओं का घनत्व अपेक्षाकृत कम होता है । 
धातु ऑक्साइड क्षारीय या उमयधर्मी होते है । अधातु ऑक्साइड की प्रकृति अम्लीय होती है । 
धातुऐं तनु अम्ल से हाइड्रोजन को विस्थापित कर हाइड्रोजन गैस निर्मित करती है ।अधातु ऑक्साइड तनु अम्ल से हाइड्रोजन को विस्थापित नहीं करती । 
धातु ऑक्साइड आयनिक होते है ।अधातु ऑक्साइड सहसंयोजी होते है ।

❇️ धातु के भौतिक गुण :-

🔶 भौतिक स्थिति :- धातुएँ सामान्यतः ठोस तथा कठोर होती हैं । प्रत्येक धातु की कठोरता अलग – अलग होती है । धातुओं का गलनांक अधिक होता है ।

नोट : अपवाद :- मर्करी को छोड़कर सारी धातुएँ कमरे के ताप पर ठोस अवस्था में पाई जाती हैं । 
गैलियम और सीज़ियम का गलनांक बहुत कम है , हथेली पर रखने पर ये धातुऐं पिघलने लगती हैं । 
क्षारीय धातु ( लीथियम , सोडियम , पोटैशियम ) इतनी मुलायम होती हैं कि उनको चाकू से भी काटा जा सकता है । इनके घनत्व तथा गलनांक भी कम होते हैं ।

🔶 चमक :- अपने शुद्ध रूप में धातु की सतह चमकदार होती है । धातु के इस गुणधर्म को धात्विक चमक कहते हैं । 

🔶 आघातवर्ध्यता :- धातुओं को पीटकर पतली चादर बनाया जा सकता है । इस गुणधर्म को आघातवर्ध्यता कहते हैं । सोना तथा चाँदी सबसे अधिक आघातवर्ध्य धातुएँ हैं । 

🔶 तन्यता :- धातु के पतले तार के रूप में खिंचने की क्षमता को तन्यता कहा जाता है । सोना सबसे अधिक तन्य धातु है , एक ग्राम सोने से 2 km लंबा तार बनाया जा सकता है ।

🔶 चालकता :- धातुएँ ऊष्मा तथा विद्युत की सुचालक होती हैं । सिल्वर तथा कॉपर अच्छे चालक हैं । 

नोट : अपवाद :- लेड तथा मर्करी ऊष्मा के कुचालक हैं । 

🔶 ध्वानिक :- सामान्यत : धातुएँ कठोर सतह से टकराने पर एक विशेष आवाज़ उत्पन्न करती हैं , अत : उन्हें ध्वानिक कहते हैं ।

❇️ अधातुओ के भौतिक गुण :-

🔶 भौतिक स्थिति :- अधातुएँ सामान्यतः या तो ठोस या फिर गैसें होती हैं ।

नोट : अपवाद :- ब्रोमीन ऐसी अधातु है जो द्रव्य होती है ।

🔶 चमक :- अधातुओं में चमक नहीं होती हैं । 

नोट : अपवाद :- आयोडीन अधातु होते हुए भी चमकीला होता है ।

🔶 आघातवर्ध्यता :- अधातुएँ आघातवर्धनीय नहीं होती हैं । अधातुऐं भंगुर होती हैं अतः इन्हें पीटने पर ये टूट जाती हैं ।

🔶 तन्यता :- अधातुएँ तन्य नहीं होती है ।

🔶 चालकता :- अधातुएँ विद्यतु तथा ऊष्मा की कुचालक होती है ।

नोट : अपवाद :- कार्बन का अपरूप हीरा ऊष्मा का सुचालक होता है । कार्बन का अपररूप ग्रेफाइट विद्युत का सुचालक होता है ।

❇️ धातुओं के रासायनिक गुणधर्म :-

📌 1. धातुओं का वायु में दहन :- 

🔹 वह रासायनिक प्रक्रम जिसमें पदार्थ ऑक्सीजन से अभिक्रिया करके ऊष्मा देता है , दहन कहलाता है । 

🔹 सामान्यतः धातुओं का वायु में दहन चमकदार ज्वाला के साथ होता है तथा लगभग सभी धातुएँ ऑक्सीजन के साथ मिलकर संगत धातु के ऑक्साइड बनाती हैं । 

धातु + ऑक्सीजन → धातु ऑक्साइड 

🔹उदाहरण के लिए , जब कॉपर को वायु की उपस्थिति में गर्म किया जाता है तो यह ऑक्सीजन के साथ मिलकर काले रंग का कॉपर ( II ) ऑक्साइड बनाता है ।

( कॉपर ) 2Cu + 0₂ → 2Cuo [ कॉपर ( II ) ऑक्साइड ]

🔹 इसी प्रकार ऐलुमिनियम ऐलुमिनियम ऑक्साइड प्रदान करता है । 

( ऐलुमिनियम ) 4Al + 3O₂ → 2Al₂O₃ [ ऐलुमिनियम ऑक्साइड ]

🔶 धातु ऑक्साइडों के गुणधर्म :- 

🔹 सामान्यत : धातु ऑक्साइडों की प्रकृति क्षारकीय होती है । ऑक्साइडों की प्रकृति क्षारकीय होने का तात्पर्य इनके अम्लों से क्रिया करके लवण तथा जल प्रदान करने से है ।

🔹 लेकिन ऐलुमिनियम ऑक्साइड , जिंक ऑक्साइड जैसे कुछ धातु ऑक्साइड अम्लीय तथा क्षारकीय दोनों प्रकार के व्यवहार प्रदर्शित करते हैं । 

🔹 अम्ल तथा क्षारक के साथ ऐलुमिनियम ऑक्साइड निम्न प्रकार से अभिक्रिया करता है 

Al₂O₃ + 6HCl → 2AlCl₃ , + 3H₂O 
Al₂O₃ + 2NaOH → 2NaAlO₂ + H₂O 
सोडियम ऐलुमिनेट 

🔹 अधिकांश धातु ऑक्साइड जल में अघुलनशील होते हैं लेकिन इनमें से कुछ जल में घुलकर क्षार प्रदान करते हैं । 

🔹 सोडियम ऑक्साइड एवं पोटैशियम ऑक्साइड निम्न प्रकार से जल में घुलकर क्षार प्रदान करते हैं ।

Na₂O(s) + H₂O(I) → 2NaOH (aq) 

 K₂O(s) + H₂O(l) → 2KOH (aq)

❇️ उभयधर्मी ऑक्साइड :-

🔹 ऐसे धातु ऑक्साइड जो अम्ल तथा क्षारक दोनों से अभिक्रिया करके लवण तथा जल प्रदान करते हैं , उभयधर्मी ऑक्साइड कहलाते हैं । 

📘 धातुओं की ऑक्सीजन के साथ अभिक्रियाशीलता :- 

🔹 धातुएँ ऑक्सीजन के साथ विभिन्न प्रकार से अभिक्रियाशीलता प्रदर्शित करती हैं :-

पोटैशियम तथा सोडियम जैसी कुछ धातुएँ इतनी तेज़ी से अभिक्रिया करती हैं कि खुले में रखने पर आग पकड़ लेती हैं । 

सिल्वर एवं गोल्ड अत्यंत अधिक ताप पर भी ऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया नहीं करते हैं । 

सामान्य ताप पर मैग्नीशियम , ऐलुमिनियम , जिंक , लेड आदि जैसी धातुओं की सतह पर ऑक्साइड की पतली परत चढ़ जाती हैं । ऑक्साइड की ये परत धातुओं को पुन : ऑक्सीकरण ( ऑक्सीजन से क्रिया ) से सुरक्षित रखती है । 

गर्म करने पर आयरन का दहन नहीं होता है , लेकिन जब बर्नर की ज्वाला में लौह चूर्ण डालते हैं तब वह तेजी से जलने लगता है ।

📌 2. धातुओं की जल के साथ अभिक्रिया :-

🔹 जल के साथ अभिक्रिया करके धातुएँ हाइड्रोजन गैस तथा धातु ऑक्साइड उत्पन्न करती हैं । कुछ धातु ऑक्साइड जल में घुलनशील होते हैं , जो जल में घुलकर धातु हाइड्रॉक्साइड प्रदान करते हैं । लेकिन सभी धातुएँ जल के साथ अभिक्रिया नहीं करती हैं । 

धातु + जल → धातु ऑक्साइड + हाइड्रोजन 

धातु ऑक्साइड + जल → धातु हाइड्रॉक्साइड

🔹 उदहारण :-

✴️ a. पोटैशियम एवं सोडियम जैसी धातुएँ ठंडे जल के साथ तेजी से अभिक्रिया करती हैं । सोडियम तथा पोटैशियम की अभिक्रिया तेज़ तथा ऊष्माक्षेपी होती है अतः इससे उत्सर्जित हाइड्रोजन तत्काल प्रज्ज्वलित हो जाती है । 

2K(s) + 2H₂O(l) → 2KOH(aq) + H₂(g) + ऊष्मीय ऊर्जा

2Na(s) + 2H₂O(l) → 2NaOH(aq) + H₂(g) + ऊष्मीय ऊर्जा 

✴️ B. जल के साथ कैल्सियम की अभिक्रिया थोड़ी धीमी होती है । यहाँ उत्सर्जित ऊष्मा हाइड्रोजन के प्रज्ज्वलित होने के लिए पर्याप्त नहीं होती है । 

Ca(s) + 2H₂0(l) → Ca(OH)₂(aq) + H₂(g) 

🔹 उपरोक्त अभिक्रिया में उत्पन्न हाइड्रोजन गैस के बुलबुले कैल्सियम धातु की सतह पर चिपक जाते हैं । अतः कैल्सियम तैरना प्रारंभ कर देता है । 

✴️ C. मैग्नीशियम शीतल जल के साथ अभिक्रिया नहीं करता है , परंतु गर्म जल के साथ अभिक्रिया करके वह मैग्नीशियम हाइड्रॉक्साइड एवं हाइड्रोजन गैस उत्पन्न करता है । हाइड्रोजन गैस के बुलबुले मैग्नीशियम धातु की सतह से चिपक जाते हैं । अतः यह भी तैरना प्रारंभ कर देती है । 

✴️ D. ऐलुमिनियम , आयरन तथा जिंक जैसी धातुएँ न शीतल जल के साथ और न ही गर्म जल के साथ अभिक्रिया करती हैं । लेकिन भाप के साथ अभिक्रिया करके यह धातु ऑक्साइड तथा हाइड्रोजन प्रदान करती हैं । 

2Al(s) + 3H₂0(g) → Al₂0₃(s) + 3H₂(g)

3Fe(s) + 4H₂O(g) → Fe₃O₄(s) + 4H₂(g)

✴️ E. लेड , कॉपर , सिल्वर तथा गोल्ड जैसी धातुएँ जल के साथ बिलकुल अभिक्रिया नहीं करती हैं । 

📌 3. धातुओं की अम्लों से अभिक्रिया :-

🔹 धातुएँ अम्लों के साथ अभिक्रिया करके संगत लवण तथा हाइड्रोजन गैस प्रदान करती हैं । 

धातु + तनु अम्ल → लवण + हाइड्रोजन

🔹 सोडियम तथा पोटैशियम धातुऐं अम्लों के साथ अत्यधिक तीव्रता से क्रिया करती हैं । 

Note :- धातुएँ नाइट्रिक अम्ल के साथ अभिक्रिया करके हाइड्रोजन गैस उत्सर्जित नहीं करती है , क्योंकि HNO₃ एक प्रबल ऑक्सीकारक है जो उत्पन्न H₂ को ऑक्सीकृत करके जल में परिवर्तित कर देता है एवं स्वयं नाइट्रोजन के किसी ऑक्साइड ( N₂O , NO , NO₂ ) में अपचयित हो जाता है । लेकिन मैग्नीशियम ( Mg ) एवं मैंगनीज ( Mn ) , अति तनु HNO₃ के साथ अभिक्रिया कर H2 गैस उत्सर्जित करते हैं ।

🔹 विभिन्न धातुओं की तनु अम्लों के साथ जैसे ( aq.HCl ) क्रिया करने की दर निम्नलिखित है । Mg > Al > Zn > Fe । कॉपर तनु HCL साथ अभिक्रिया नहीं करता है ।

📌 4. धातु लवणों के विलयन के साथ धातुओं की अभिक्रियाएँ :-

🔹 अधिक अभिक्रियाशील धातु अपने से कम अभिक्रियाशील धातु को उसके यौगिक के विलयन या गलित अवस्था से विस्थापित कर देती है । इसे विस्थापन अभिक्रिया कहते है ।

🔹 अगर धातु ( A ) , धातु ( B ) को उसके विलयन से विस्थापित कर देती है तो यह धातु ( B ) की अपेक्षा अधिक अभिक्रियाशील है । 

धातु ( A ) + ( B ) का लवण विलयन → ( A ) का लवण विलयन + धातु ( B )

❇️ सक्रियता श्रेणी :-

🔹 सक्रियता श्रेणी वह सूची है जिसमें धातुओं की क्रियाशीलता को अवरोही क्रम में व्यवस्थित किया जाता है ।

Kपोटैशियमसबसे अधिक अभिक्रियाशील
Naसोडियम ⬇
Caकैल्सियम ⬇
Mgमैग्नीशियम ⬇
ALऐलुमिनियम ⬇
Znजिंकघटती अभिक्रियाशीलता
Feआयरन⬇
Pbलेड⬇
[ H ][ हाइड्रोजन ]⬇
Cuकॉपर ( ताँबा )⬇
Hgमर्करी ( पारद )⬇
Agसिल्वर⬇
Auगोल्डसबसे कम अभिक्रियाशील

❇️ धातुओं की अधातुओं के साथ अभिक्रिया :-

🔹 तत्वों की अभिक्रियाशीलता , संयोजकता कोश को पूर्ण करने की प्रवृति के रूप में समझी जा सकती है । ।

धातु के परमाणु , अपने संयोजकता कोश से इलेक्ट्रान त्याग करते हैं तथा धनायन बनाते हैं । 

अधातु के परमाणु , संयोजकता कोश में इलेक्ट्रॉन ग्रहण कर ॠणायन बनाते है । 

विपरीत आवेशित आयन एक – दूसरे को आकर्षित करते हैं तथा मजबूत स्थिर वैद्युत बल में बँधकर आयनिक यौगिक बनाते हैं ।

❇️ आयनिक यौगिकों के गुणधर्म :-

🔶 भौतिक प्रकृति :- धन एवं ऋण आयनों के बीच मजबूत आकर्षण बल के कारण आयनिक यौगिक ठोस एवं कठोर होते हैं । ये यौगिक सामान्यतः भंगुर होते हैं तथा दाब डालने पर टुकड़ों में टूट जाते हैं ।

🔶 गलनांक एवं क्वथनांक :- आयनिक यौगिकों का गलनांक एवं क्वथनांक बहुत अधिक होता है क्योंकि मजबूत अंतर – आयनिक आकर्षण को तोड़ने के लिए ऊर्जा की पर्याप्त मात्रा की आवश्यकता होती है । 

🔶 घुलनशीलता :- वैद्युत संयोजक यौगिक सामान्यतः जल में घुलनशील तथा किरोसिन , पेट्रोल आदि जैसे विलायकों में अविलेय होते हैं । 

🔶 विद्युत चालकता :- ठोस अवस्था में आयनिक यौगिक विद्युत का चालन नहीं करते हैं , क्योंकि ठोस अवस्था में दृढ़ संरचना के कारण आयनों गति संभव नहीं होती है । लेकिन गलित या जलीय अवस्था में आयन स्वतंत्र रूप से गमन करते हैं एवं विद्युत का चालन करते हैं ।

❇️ धातुओं की प्राप्ति :-

🔹 पृथ्वी की भूपर्पटी धातुओं का मुख्य स्रोत है ।

🔶 खनिज :- पृथ्वी की भूपर्पटी में प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले तत्वों या यौगिकों को खनिज कहते हैं । 

🔶 अयस्क :- कुछ स्थानों पर खनिजों में कोई विशेष धातु काफ़ी मात्रा में होती है जिसे निकालना लाभकारी होता है । इन खनिजों को अयस्क कहते हैं ।

❇️ धातुओं का निष्कर्षण :- 

🔹 अभिक्रियाशीलता के आधार पर हम धातुओं को निम्न तीन वर्गों में विभाजित कर सकते हैं :-

  • निम्न अभिक्रियाशील धातुएँ 
  • मध्यम अभिक्रियाशील धातुएँ 
  • उच्च अभिक्रियाशील धातुएँ । 

🔹 प्रत्येक वर्ग में आने वाली धातुओं को प्राप्त करने के लिए विभिन्न तकनीकों का उपयोग किया जाता है ।

🔹 सक्रियता श्रेणी में नीचे आने वाली धातुएँ सबसे कम अभिक्रियाशील होती हैं । ये स्वतंत्र अवस्था में पाई जाती हैं । उदाहरण के लिए , गोल्ड ( सोना ) , सिल्वर ( चाँदी ) , प्लैटिनम एवं कॉपर ( ताँबा ) स्वतंत्र अवस्था में पाए जाते हैं । कॉपर एवं सिल्वर , अपने सल्फाइड या ऑक्साइड के अयस्क के रूप में संयुक्त अवस्था में भी पाए जाते हैं ।

🔹  सक्रियता श्रेणी में सबसे ऊपर की धातुएँ ( K , Na , Ca , Mg एवं Al ) इतनी अधिक अभिक्रियाशील होती हैं कि ये कभी भी स्वतंत्र तत्व के रूप में नहीं पाई जातीं । अयस्क से शुद्ध धातु का निष्कर्षण निम्न चरणों में होता है ।

❇️ 1. अयस्कों का समृद्धीकरण :-

🔹 पृथ्वी से खनिज अयस्कों में मिट्टी , रेत आदि जैसी कई अशुद्धियाँ होती हैं , जिन्हें गैंग कहते हैं । अयस्कों से गैंग को हटाने के लिए जिन प्रक्रियाओं का उपयोग होता है वे अयस्क एवं गैंग के भौतिक या रासायनिक गुणधर्मों पर आधारित होती हैं । इस पृथक्करण के लिए विभिन्न तकनीक अपनायी जाती है ।

❇️ 2. सक्रियता श्रेणी में नीचे आने वाली धातुओं का निष्कर्षण :- 

🔹 इन धातुओं के ऑक्साइडों को केवल गर्म करने से ही धातु प्राप्त की जा सकती है । 

🔹 उदहारण के लिए :- सिनाबार ( HgS ) , मर्करी ( पारद ) का एक अयस्क है । वायु में गर्म करने पर यह सबसे पहले मर्क्यूरिक ऑक्साइड ( Hg0 ) में परिवर्तित होता है और अधिक गर्म करने पर मर्क्यूरिक ऑक्साइड , मर्करी ( पारद ) में अपचयित हो जाता है ।

2HgS(s) + 3O₂(g) [ तापन →] 2HgO(s) + 2SO₂(g)

2HgO(s) [ तापन → ] 2Hg(l) + O₂(g) 

❇️ 3. सक्रियता श्रेणी में मध्य में स्थित धातुओं का निष्कर्षण :- 

🔹 प्रकृति में यह प्रायः सल्फाइड या कार्बोनेट के रूप में पाई जाती हैं । सल्फाइड या कार्बोनेट की तुलना में धातु को उसके ऑक्साइड से प्राप्त करना अधिक आसान है अतः कार्बोनेट व सल्फाइड को पहले ऑक्साइड में बदला जाता है । 

🔶 a . भर्जन :- सल्फाइड अयस्क को वायु की उपस्थिति में अधिक ताप पर गर्म करने पर यह ऑक्साइड में परिवर्तित हो जाता है । इस प्रक्रिया को भर्जन कहते हैं । 

तापन जिंक सल्फाइड अयस्क का भर्जन :- 2ZnS(s) + 3O₂(g) [ तापन → ] 2ZnO(s) + 2SO₂(g) 

🔶 b . निस्तापन :- कार्बोनेट अयस्क को सीमित वायु में अधिक ताप पर गर्म करने से यह ऑक्साइड में परिवर्तित हो जाता है । इस प्रक्रिया को निस्तापन कहा जाता है ।

तापन जिंक के कार्बोनेट अयस्क का निस्तापन :- ZnCO₃(s) [ तापन → ] ZnO(s) + CO₂(g)

🔶 c . अपचयन :- कार्बन जैसे उपयुक्त अपचायक का उपयोग कर भर्जन या निस्तापन से प्राप्त धातु ऑक्साइडों से धातु प्राप्त की जाती है । उदाहरण के लिए जब जिंक ऑक्साइड को कार्बन के साथ गर्म किया जाता है , तो यह जिंक धातु में अपचयित हो ता है । 

 ZnO(s) + C(s) [ तापन → ] Zn(s) + CO(g)

Note :- धातु निष्कर्षण में विस्थापन अभिक्रियाएँ अत्यधिक ऊष्माक्षेपी होती हैं । इसमें उत्सर्जित ऊष्मा की मात्रा इतनी अधिक होती है कि धातुएँ गलित अवस्था में प्राप्त होती हैं । आयरन ( III ) ऑक्साइड ( Fe₂O₃ ) के साथ ऐलुमिनियम की अभिक्रिया का उपयोग रेल की पटरी एवं मशीनी पुर्जों की दरारों को जोड़ने के लिए किया जाता है । इस अभिक्रिया को थर्मिट अभिक्रिया कहते हैं । 

Fe₂O₃(s) + 2Al(s) → 2Fe(l) + Al₂O₃(s) + ऊष्मा

❇️ 4. सक्रियता श्रेणी में सबसे ऊपर स्थित धातुओं का निष्कर्षण :-

🔹 इन धातुओं को विद्युत अपघटनी अपचयन द्वारा प्राप्त किया जाता है । 

🔹 उदाहरण के लिए :- सोडियम , मैग्नीशियम एवं कैल्सियम को उनके गलित क्लोराइडों के विद्युत अपघटन से प्राप्त किया जाता है । कैथोड ( ऋण आवेशित इलैक्ट्रोड ) पर धातुएँ निक्षेपित हो जाती हैं तथा ऐनोड ( धन आवेशित इलैक्ट्रोड ) पर क्लोरीन मुक्त होती है । 

🔹 अभिक्रियाएँ इस प्रकार हैं :- 

कैथोड पर Na⁺ + e⁻ → Na 

ऐनोड पर 2Cl⁻ → Cl₂ + 2e⁻

🔹 इसी प्रकार , ऐलुमिनियम ऑक्साइड के विद्युत अपघटनी अपचयन से ऐलुमिनियम प्राप्त किया जाता है । 

❇️ 5. धातुओं का परिष्करण :-

🔹 विभिन्न अपचयन प्रक्रमों से प्राप्त धातुएँ पूर्ण रूप से शुद्ध नहीं होती हैं । इनमें अपद्रव्य होते हैं जिन्हें हटाकर ही शुद्ध धातु प्राप्त की जा सकती है । धातुओं से अपद्रव्य को हटाने के लिए सबसे अधिक प्रचलित विधि विद्युत अपघटनी परिष्करण है । 

❇️ विद्युत अपघटनी परिष्करण :-

🔹 कॉपर , जिंक , टिन निकेल , सिल्वर , गोल्ड आदि अनेक धातुओं का परिष्करण विद्युत अपघटन द्वारा किया जाता है । 

🔹 इस प्रकम में अशुद्ध धातु को ऐनोड तथा शुद्ध धातु की पतली परत को कैथोड बनाया जाता है ।

🔹 धातु के लवण विलयन का उपयोग विद्युत अपघट्य के रूप में होता है । 

🔹 विद्युत प्रवाह करने के पश्चात् ऐनोड में अशुद्ध धातु विद्युत अपघट्य में घुल जाती है । तथा उतनी ही मात्रा में शुद्ध कॉपर विद्युत अपघट्य से कैथोड पर निक्षेपित होती है । 

🔹 अविलेय अशुद्धियां ऐनोड तली पर निक्षेपित होती है , जिसे ऐनोड पंक कहते हैं ।

❇️ संक्षारण :-

🔹 जब कोई धातु वातावरण में उपस्थित पदार्थों ( मुख्यत : ऑक्सीजन , अम्ल , आद्रता इत्यादि ) के संपर्क में आकर क्षय होना प्रारम्भ हो जाती है , तो इसे संक्षारण कहते हैं । 

🔶 सिल्वर का संक्षारण :- खुली वायु में कुछ दिन छोड़ देने पर सिल्वर की वस्तुएँ काली हो जाती हैं । ऐसा सिल्वर का वायु में उपस्थित सल्फर के साथ अभिक्रिया करके सिल्वर सल्फाइड ( Ag₂S ) की परत बनने के कारण होता है । 

🔶 कॉपर का संक्षारण :- कॉपर वायु में उपस्थित आर्द्र CO₂ से अभिक्रिया के कारण अपनी भूरे रंग की चमक धीरे – धीरे खो देता है तथा इस पर क्षारीय कॉपर कार्बोनेट की हरे रंग की परत चढ़ जाती है । 

🔶 लौह का संक्षारण :- लंबे समय तक आर्द्र वायु में रहने पर लोहे पर भूरे रंग के पदार्थ की परत चढ़ जाती है जिसे जंग ( Fe₂O₃. nH₂O ) कहते हैं ।

❇️ संक्षारण से सुरक्षा :- 

🔹 धातुओं पर पेंट करके , तेल लगाकर , ग्रीज़ लगाकर , यशदलेपन , क्रोमियम लेपन , ऐनोडीकरण या मिश्रधातु बनाकर संक्षारण को रोका या धीमा किया जा सकता है । 

❇️ यशदलेपन :-

🔹 लोहे एवं इस्पात को जंग से सुरक्षित रखने के लिए उन पर जस्ते ( जिंक ) की पतली परत चढ़ाना यशदलेपन कहलाता है ।

❇️ मिश्रधातु :-

🔹 दो या दो से अधिक धातुओं ( कभी – कभी अधातु भी उपस्थित होता है ) के समांगी मिश्रण को मिश्रातु / मिश्रधातु कहते हैं । 

🔹 इसे तैयार करने के लिए पहले मूल धातु को गलित अवस्था में लाया जाता है एवं तत्पश्चात दूसरे तत्वों को एक निश्चित अनुपात में इसमें विलीन किया जाता है । फिर इसे कमरे के ताप पर शीतलतकृत किया जाता है ।

🔹 यदि कोई एक धातु पारद है तो इसके मिश्रातु को अमलगम कहते हैं । शुद्ध धातु की अपेक्षा उसके मिश्रातु की विद्युत चालकता तथा गलनांक कम होता है ।

🔶 उदहारण के लिए :- 

  • ताँबा एवं जस्ते ( Cu एवं Zn ) की मिश्रातु पीतल तथा ताम्र एवं टिन ( Cu एवं Sn ) की मिश्रातु काँसा विद्युत के कुचालक हैं , लेकिन ताम्र का उपयोग विद्युतीय परिपथ बनाने में किया जाता है ।
  • सोल्डर , यह सीसा और टिन ( Pb एवं Sn ) का मिश्रधातु है जिसका गलनांक बहुत कम होता है और इसका उपयोग विद्युत तारों को परस्पर वेल्डिंग के लिये करते हैं ।

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10 Class Science Chapter 4 कार्बन एवं उसके यौगिक notes in Hindi Textbook NCERT Class Class 10 Subject विज्ञान Chapter Chapter 4 Chapter Name कार्बन एवं उसके यौगिक Category Class 10 Science Notes Medium Hindi Class 10 science Chapter 4 कार्बन एवं उसके यौगिक Notes in hindi  Chapter = 4   कार्बन एवं उसके यौगिक  कार्बन :-  कार्बन एक सर्वतोमुखी तत्व है । कार्बन भूपर्पटी में खनिज के रूप में 0.02% उपस्थित है । वायुमंडल में यह कार्बन डाइऑक्साइड के रूप में 0.03% उपस्थित है । सभी सजीव संरचनायें कार्बन पर आधरित हैं । कागज , प्लास्टिक , चमड़े और रबड़ में कार्बन होता है ।  कार्बन एवं उसके यौगिकों का उपयोग :-  कार्बन एवं उसके यौगिकों का उपयोग अधिकतर अनुप्रयोगों में ईंधन के रूप में किया जाता है क्योंकि कार्बन के ऑक्सीजन ( वायु ) में दहन पर कार्बन डाइऑक्साइड जल का निर्माण होता है तथा बहुत बड़ी मात्रा में ऊष्मा और प्रकाश उत्पन्न होता है ।   इसके अतिरिक्त इनका ज्वलन ताप मध्यम , कैलोरी मान अधिक होता है तथा इनके दहन से कोई अवशेष नहीं बचता और न ही हानिकारक गैसें ...

Class 10 History Chapter 1 यूरोप में राष्ट्रवाद का उदय

                    Class 10 History Chapter 1 यूरोप में राष्ट्रवाद का उदय Notes in Hindi                                                                                                         अध्याय = 1                                                                       यूरोप में राष्ट्रवाद का उदय           राष्ट्र :- अरनेस्ट रेनर के अनुसार समान भाषा नस्ल धर्म से बने क्षेत्र को राष्ट्र कहते हैं ।  ए...

Class 10 science Chapter 12 विद्युत Notes in Hindi

  10 Class Science Chapter 12 विद्युत notes in hindi Class 10 science Chapter 12 विद्युत notes in hindi.  जिसमे हम विद्युत प्रवाह , ओम का नियम , प्रतिरोधकता ,  कारक  जिन पर किसी चालक का प्रतिरोध निर्भर करता है ,  प्रतिरोधकों का श्रेणी क्रम संयोजन , विधुत धारा का तापीय प्रभाव आदि के बारे में पड़ेंगे । Class 10 science Chapter 12 विद्युत Notes in hindi  Chapter = 12   विद्युत  विद्युत ऊर्जा :-  किसी चालक में विद्युत आवेश प्रवाहित होने से जो ऊर्जा व्यय होती है उसे विद्युत ऊर्जा कहते हैं ।   यदि किसी चालक के सिरों के बीच विभवांतर V वोल्ट हो , तो q कूलॉम आवेश के चालक के एक सिरे से दूसरे सिरे तक ले जाने में व्यय विद्युत ऊर्जा  w = qv   विद्युत परिपथ :-  किसी विद्युत धारा के सतत तथा बंद पथ को विद्युत परिपथ कहते है ।  आवेश :-  आवेश परमाणु का एक मूल कण होता है । यह धनात्मक भी हो सकता है और ऋणात्मक भी । समान आवेश एक – दूसरे को प्रतिकर्षित करते हैं । असमान आवेश एक – दूसरे को आकर्षित करते हैं । कूलॉम...